Saturday, 8 April 2017

फ़िल्मी अवार्ड

       
       किसी से भैया कुछ न पूछो ।अब हर चिज में मीन मेख  ठीक तो नहीं। लो देखो कैसे सब इस अवार्ड के धकियाये रहे है। अब सबके एक पसंद थोड़े सो सके। जकरा जे पसंद आवे , दे दिहिस।अब हर बाते के एक रंग से देखना ठीक नहीं।
       अब रुस्तम के बीबी जो भी किये उसमे रुस्तम के का गलती रहे। वो तो अपने काम ठीके किये थे सो अवार्ड मिल गयो। अब एही में देशी और विदेशी कहाँ से आ गया। लेकिन कुछो तो उ का बोले है जूरी ऊ के सोचे चाही।अब भैया समय ऐसे ही ख़राब है सो दो दो बेटियों को पाले में का हाल होबे है सो जा के उनका पूछो। और उतने नहीं बेटियस सबके यु मिटिया में लोटाय लोटाय के दंगल करवाना कोनो आसान काम थोड़े रहे।  देखो कैसे दुनु बिहनिया के पहलवान बनाय दिस। लेकिन जो भयो ठीक नहीं है कहा  "बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ " के नारा सब जगह भांय भांय सुनाई देत है।लेकिन जब एक बेचारा बाप उतनी मुश्किल से अपन बेटी को बनावत हो तो कोई इनाम नहीं।भैया कुछो तो बाप के दर्द समझो। लेकिन समझे कैसे बेटी के बाप होये तब तो। अब जाओ भैया अवार्ड तो चले गवे कही और। सुन्दर मेहरारू के देख सब भैया ओकरे पसंद केलिस तो अब का कहे।अब कितनो सुल्तान सुल्तान चिल्लाय लियो ई रुकबे नहीं। कहा सुल्तान के मेहरारू और कहा रुस्तम के। ले गयो भैया अब गावो खूब अशहिष्णु राग, गला भोथरा जाहिये लेकिन अवार्ड वाला सुर न पइबे। लेकिन कुछो कहो बिटिया नीरजा तो नाम रौशन करे दिहिस। एहि में कोनो दिक्कत होवे के न चाही। 
       अब एके ठो के लेके अइसन बात ठीक नहीं। बाकी ऐसे भी कलाकर कोनो अवार्ड के भूखे थोड़े रहिस। उनका तो कला के सम्मान चाही दर्शको के प्यार चाहिस और का। लेकिन भैया जे कहो रुस्तम कोनो ठीक किये रहिस का ? बीबी तो सुल्तान के ठिक रहिस। बाकी जूरी जाने हमको का पता।
    तब तक काका जोर से आवाज दिए-अरे मंसुखवा बेरिया बीते जा रहा है ,चारा देवेगा की ऐसे घोड़ा बेचकर सोये रहेगा। मनसुख पता नहीं किससे सपने में भाषण बाजी कर रहा था।
      

मन की बात

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